कभी 50 – 60 रुपये के लिए करते थे मजदूरी, घर और जमीन गिरवी रख की पढ़ाई, और बन गए IAS ऑफिसर.

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सभी का सपना होता है कि बड़ा होकर एक अच्छा मुकाम हासिल करे, अच्छी नौकरी करे उसके पास अपने घर हो, वो अपने परिवार को हर खुशी दे सके. लेकिन सब की ऐसी आर्थिक स्थिति नहीं होती है कि वो अपने सपने को पूरा कर सके, तो वहीं कई लोग ऐसे होते हैं जो अपनी आर्थिक स्थिति से लड़ कर अपने सपने को पूरा कर लेते हैं, ऐसे ही लोगों एक नाम साल 2020 बैच के IAS माधव गिट्टे का, जो कभी 40-50 रुपये के लिए खेतों में मजदूरी किया करते थे, रोज 20-25 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाया करते थे.

वहीं उन्हें अपने जिंदगी कुछ बड़ा करना था जिसके लिए एक बार तो उन्होंने अपने सारे खेत जिससे उनके परिवार का गुजारा होता था और घर सब कुछ गिरवी रख दिया था, ताकि वो पढ़ाई कर सकें.

कौन हैं IAS माधव गिट्टे?

माधव गिट्टे 2020 बैच IAS ऑफिसर है, जो महाराष्ट्र के नांदेड़ के रहने वाले है. बता दें माधव गिट्टे एक गरीब परिवार से आते. इनके पिताजी के पास कुछ थोड़े से खेत थे जिससे ही इनके परिवार का गुजारा होता था. इनके परिवार में इनके मां बाप के अलावा इनके पांच भाई और बहनें भी थीं. इनके पिताजी के साथ साथ इनकी मां भी खेतों में काम किया करती थीं, कभी तो परेशानियां इतनी बढ़ जाती है कि माधव गिट्टे को दूसरे के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी, जिसके बदले इन्हें 50-60 मिला करते थे.

माधव गिट्टे की संघर्ष की कहानी.

इतने परेशानियों के बावजूद माधव को पढ़ने का बहुत शौक था लेकिन उनके गाँव भी स्कूल नहीं था, वो हर रोज अपने गाँव से लगभग 20-25 किलोमीटर दूर साइकिल चलाकर स्कूल जाया करते थे. इसी संघर्ष के समय माधव को एक और बड़ा झटका लगा जब वो 11वीं क्लास में थे उनके सिर से उनके मां का साया छुट गया.

बारहवीं पास करने के बाद माधव ने आगे पढ़ाई करने की सोची तो पैसे की आदत आने लगी, फिर इन्होंने कहीं से डिप्लोमा करने का सोचा, गाँव वालों की मदद से पैसे जुटाए और फिर 1 साल का डिप्लोमा किया. इसके बाद इन्होंने इंजीनियरिंग करने का सोचा और पुणे की एक इंजीनियरिंग कॉलेज में उनका दाखिला भी हो गया.

लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म होते होते, उन्हें अपने पूरे खेत यहां तक कि घर को भी गिरवी रखना पड़ा था, और कई लोगों से काफी कर्ज भी ले चुके थे. किसी तरह इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म हुई और फिर इन्हें नौकरी मिली.

नौकरी मिलने के बाद सबसे पहले अपने कर्ज चुकाए और इनके घर के हालात बेहतर होने लगे. लेकिन यह यहाँ भी नहीं रुके, अपने एक दोस्त के कहने पर इन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की, और नौकरी के साथ साथ इन्होंने तैयारी भी की लेकिन आगे चल कर अपनी यूपीएससी की तैयारी करने के लिए नौकरी छोड़नी पडी.

लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद इनके दोस्तों ने इन्हें काफी सपोर्ट किया और वह दिल्ली में रहकर तैयारी करने लगे. साल 2017 में इन्होंने पहली बार यूपीएससी का एक्जाम दिया. लेकिन प्री एक्जाम भी क्लीयर नहीं कर पाए. 2018 में फिर एक्जाम दिया, इस बार इनका सिलेक्शन इंडियन ऑडिट में हुआ लेकिन इनके सपने में तो IAS बनना ही बसा था. साल 2019 में इन्होंने एक बार फिर से एक्जाम दिया और इस बार उन्होंने अपने सपनों को हासिल कर लिया.

माधव गिट्टे बताते हैं कि जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे तो उन्होंने लोन लेनी की भी कोशिश की थी लेकिन किसी भी बैंक ने इन्हें लोन नहीं दिया था, तब इन्हें लगा था कि अपने देश शिक्षा पाना कितना मुश्किल है, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गरीबी से लड़ते हुए और पढ़ाई के दौरान अपने खेत और घर सबको गिरवी रख कर, इन्होंने अपने सपने को हासिल कर लिया और बन गए साल 2020 बैच के आईएएस ऑफिसर.