नाबालिग की जबरन हो रही थी शादी बीएसएफ जवानों ने जाकर रुकवायी शादी

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बाल विवाह की समस्या तो हमारे देश में बहुत आम हो चली है आधुनिक भारत में भी लोग इसी मानसिकता में रहते हैं कि लड़की की जल्दी से जल्दी शादी कर दी जाए. कानून होने के बावजूद इस कानून को कोई भी अच्छे तरीके से फॉलो नहीं करता है. आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे एक नाबालिक की शादी को बीएसएफ के जवानों ने रुकवा दिया.

Forced Marriage
दरअसलयह घटना भारत बांग्लादेश बॉर्डर की है यहां एक नीलमबाजार पड़ता है जिसमें बीती 14 जुलाई को 15 साल की लड़की की जबरन शादी कराई जा रही थी, लेकिन जब यह बात बीएसएफ के जवानों को पता चली तो तुरंत वो एक्शन में आ गए और गांव में जाकर लड़की को इस जाल में फंसने से बचा लिया और उसके बाद बीएसएफ जवान ने सब को अपने जिम्मे में लेकर पुलिस को सौंप दिया जिनमें लड़के और माता पिता को पुलिस के हवाले कर दिया गया इसके बाद पुलिस ने नाबालिग बच्ची को करीमगंज के चाइल्ड प्रोटक्शन ओम भेज दिया.

wedding

एक रिपोर्ट के मुताबिक 134 बीएन बीएसएफ और बीओपी इंटेलिजेंस स्टाफ ने का कोई गांव में ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया था. बीएसएफ (bsf) जवानों ने बताया कि अगर वह मौके पर ना पहुंचते तो शायद बहुत देर हो जाती इसीलिए उन्होंने समय ना गवांते हुए तुरंत वहां पहुंचे वहां पहुंचकर देखा तो शादी की रस्में चल रही थी. जब हम वहां पहुंचे तो शाम के 4:00 बजे हुए थे इस शादी ही के बारे में हम एक गुप्त सूचना मिली थी जिसके आधार पर ही हम वहां गए थे, और सभी को रंगे हाथों पकड़ लिया.

अधिकारियों ने आगे कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है और इस पर समाधान करना बहुत जरूरी है और यह बातें आम जनता को भी सोचनी पड़ेगी की कम उम्र में शादी ना करा कर बल्कि उनकी शिक्षा पर जोर देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाएं होनी ही नहीं चाहिए यह समाज में बहुत बड़ा प्रभाव डालते हैं.

स्वतंत्र भारत में भी सरकार द्वारा भी इसे रोकने के कई प्रयत्न किये गए और कई क़ानून बनाये गए जिस से कुछ हद तक इनमे सुधार आया परन्तु ये पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ. सरकार द्वारा कुछ क़ानून बनाये गए हैं जैसे बाल-विवाह निषेध अधिनियम 2006 जो अस्तित्व में हैं.

बाल विवाह को रोकने हेतु कुछ उपाय

1.    समाज में जागरूकता फैलाना.
2.    मीडिया इसे रोकने में प्रमुख भागीदारी निभा सकती हैं.
3.    शिक्षा का प्रसार
4.    ग़रीबी का उन्मूलन.
5.    जहाँ मीडिया का प्रसार ना हो सके वह नुक्कड़ नाटको का आयोजन करना चाहिए.