देश की एकमात्र MBA सरपंच, आईटी की नौकरी छोड़ बदल दिया गाँव का नक्शा.

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आज कल के सभी नौजवानों का सपना होता है, कि वो पढ़ लिख कर किसी बड़े शहर में एक अच्छी सी नौकरी हासिल करें और वहीं बड़े शहर में अपने परिवार के साथ एक अच्छी जिंदगी गुजारे. लेकिन जिस गाँव की मिट्टी से वो ताल्लुक रखते हैं वो उसके बारे में नहीं सोचते. लेकिन आज हम एक ऐसी लड़की की कहानी बतायेंगे जिसने अपने शहर की नौकरी छोड़ दिया और अपने गाँव पहुंच गई और वहाँ रहकर उसने अपने गाँव का हुलिया ही बदल दिया.

यह कहानी है है राजस्थान के एक छोटे से गाँव सोडा की छवी राजावत की, जिन्होंने अपनी IT कंपनी की नौकरी छोड़ अपने गाँव का विकास करना बेहतर समझा.

बता दें छवी राजावत का जन्म राजस्थान के जयपुर में हुआ, बुनियादी शिक्षा पहले आंध्रा प्रदेश और फुर अजमेर से पूरी करने के बाद, उन्होंने दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया और फिर पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मॉडर्न मैनेजमेंट से एमबीए. एमबीए के बाद टाइम्स ऑफ इंडियन और एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी, और गाँव लौटने का फैसला किया ताकि वो गाँव के लिए काम कर सकें.

How Chhavi Rajawat became India's youngest village sarpanchराजस्थान के जिस सोडा नामक गाँव से ये आती हैं, वो गाँव काफी पिछड़ा हुआ था, इन्होने साल 2011 में अपने गाँव से सरपंच का चुनाव लड़ और जीत हासिल की. सरपंच बनने के बाद छवी ने बिल्कुल अपने नाम की तरह ही काम किया और वो हर चीज़ जिससे गाँव के लोग अब तक महरूम थे, उन्होंने उस पर काम किया. अगर हम गाँव की किसी औरत सरपंच के बारे में सोचते हैं, तो तो हमें पल्लू के अंदर मुँह छुपाये हुए एक औरत दिखाई पड़ती है, लेकिन छवी ऐसी बिल्कुल भी नहीं थीं, खूबसूरती के और अपने चाल चलन के अंदाज में वो बॉलीवुड ऐक्ट्रिसेज को सीधा मात देती हैं, और गाँव की गालियों में कहाँ साड़ी और घूंघट चलता है वहाँ उन्होंने जीन्स और टॉप वाली सरपंच बन बैठी.

सोडा गाँव में छवी ने पानी हर घर में टॉयलेट और पक्की सड़क और एजुकेशन पर काम किया, और साल 2020 तक उनका सपना अपने गाँव के शिक्षा स्तर को 100 तक करने का है. छवी के इस अंदाज से आज उनका गाँव और वो देश ही नहीं ब्लकि पूरी दुनिया में ही जानी जाती हैं.