राहुल गांधी ने बताया कांग्रेस क्यों नहीं जीत रही है चुनाव

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हावर्ड कैनेडी स्कूल के एम्बेसडर निकोलस बर्न से शुक्रवार (02 अप्रैल) की रात बातचीत की। इस बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), आरएसएस, भारत के आंतरिक मुद्दे, चीन के साथ संबंध, कोरोना लॉकडाउन सहित तमाम मामलों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बातचीत के दौरान ये भी बताया कि अगर वो देश के प्रधानमंत्री होते तो क्या करते। राहुल गांधी ने कहा है कि अगर वह भारत के प्रधानंमत्री होते तो ग्रोथ (विकास) की जगह नौकरियों पर फोकस करते। राहुल गांधी ने कहा कि आज भारत को ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजित करने की जरूरत है।

राहुल गांधी ने ऑनलाइन चर्चा के दौरान कहा, “मैं ग्रोथ-सेंट्रिक आइडिया से जॉब-सेंट्रिक आइडिया की ओर बढ़ूंगा। मैं कहूंगा कि हमें ग्रोथ की जरूरत है, लेकिन प्रोडक्शन और जॉब क्रिएशन और वैल्यू एडिशन को आगे बढ़ाने की हमें ज्यादा जरूरत है।”

मुझे 9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि में कोई दिलचस्पी नहीं है: राहुल गांधी

प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने पर वह किन नीतियों को प्राथमिकता देंगे? हावर्ड कैनेडी स्कूल के एम्बेसडर निकोलस बर्न द्वारा पूछे गए इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, ”मुझे 9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि में कोई दिलचस्पी नहीं है, अगर देश में लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है तो।

देश की अर्थव्यवस्था के विकास का कोई मतलब नहीं है अगर आप नौकरियों का सृजन नहीं कर पा रहे हैं तो। वर्तमान में यदि हमारे देश के विकास को देखेंग तो मुझे लगता है कि विकास और नौकरी के बीच एक प्रकार का संबंध होना चाहिए। चीन वैल्यू एडिशन में लीड कर रहा है। मैं आजतक कभी ऐसे चीनी नेता से मिला जो मुझसे कहता है कि हमारे यहां जॉब क्रिएशन की दिक्कत है।”

राहुल ने बताया आखिर क्यों कोई पार्टी चुनाव नहीं जीत पा रही है?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने , तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आज भारत में बीजेपी ने कब्जा कर लिया है। भारत में बीजेपी को छोड़कर कोई भी चुनाव नहीं जीत पा रहा है। अकेले कांग्रेस ही नहीं, बसपा, सपा, राकांपा जैसी अन्य पार्टियां भी चुनाव नहीं जीत रही हैं, क्योंकि कोई भी चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा, चुनाव लड़ने के लिए संस्थागत ढांचे की जरूरत पड़ती है। जो संस्थाएं एक निष्पक्ष लोकतंत्र को चलाने में मदद करती है। लेकिन यहां तो उन्हें पूरी तरह से कब्जा में ले लिया गया है। बीजेपी के पास पूर्ण वित्तीय और मीडिया का प्रभुत्व है।

राहुल गांधी ने कहा, “चुनाव लड़ने के लिए, मुझे संस्थागत संरचनाओं की आवश्यकता है, मुझे एक न्यायिक प्रणाली की आवश्यकता है जो मुझे बचाती है, मुझे एक मीडिया की आवश्यकता है जो स्वतंत्र हो, मुझे वित्तीय समता की आवश्यकता है, मुझे संरचनाओं का एक पूरा सेट चाहिए जो वास्तव में मुझे एक राजनीतिक पार्टी संचालित करने की अनुमति दे सके। लेकिन यह स्थिति है ही नहीं।2014 के बाद पूरा परिप्रेक्ष्य ही बदल गया है।”