इस शख्स ने प्लास्टिक के उपयोग से बना डाली 1000 किलोमीटर सड़कें अपनाई यह तकनीक-

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हम सभी जानते हैं कि प्लास्टिक हमारे जीवन को प्रभावित करता है और काफी ज्यादा प्रदूषण फैलाता है लेकिन सोचिए जब इस प्लास्टिक का उपयोग कुछ अच्छे काम में आने लगे तो कैसा होगा? ऐसा ही कुछ करने का काम किया है प्रोफेसर राजा गोपालन वासुदेवन ने, इन्होंने इस पर काफी समय के बाद सफलता हासिल की है. बताया जाता है कि यह पिछले काफी समय से इस प्रोजेक्ट पर कड़ी मेहनत कर रहे थे और लगभग 18 से 20 घंटे काम करते थे आखिरकार उन्हें इस प्रोजेक्ट पर सफलता मिल ही गई.

One Man's Trash Is Another Man's Treasure': Meet India's 'Plastic Man' |  Swachh Warriorsमदुरै के TCE इंजीनियरिंग कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर कई सालों से प्लास्टिक रिसाइक्लिंग करने की दिशा में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं, उन्होंने प्लॉस्टिक के कचरे से सड़कें भी बनवाई हैं. इनके योगदान को देखते हुए ये ‘Plastic Man of India‘ के नाम से भी प्रसिद्ध हो गए हैं. इतना ही इन प्रोफेसर साहब को प्लास्टिक कचरे के रिसायकल के लिए शानदार काम करने के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित भी किया है. जाहिर है, इन प्रोफेसर साहब के बारे में पढ़कर आप इनके सँघर्ष, प्रयासों और कार्यों के बारे में और अधिक जानने के लिए उत्सुक होंगे, तो चलिए जानते हैं कौन हैं वे प्रतिभाषाली प्रोफेसर जिन्होंने प्लास्टिक कचरे से सड़कें बना डाली.

Maharashtra to consult 'Plastic Man of India' for building roads - The Hinduइस कार्य के लिए वासुदेवन जी को एक लंबे अरसे के बाद पहचान मिली। कहा जाता है कि उन्होंने लगभग 10 वर्षों तक बहुत मेहनत की और तब जाकर उनकी इस टेक्निक को मान्यता प्राप्त हुई थी. ऐसा भी कहा जाता है कि एक बार जब वे अपने इस प्रोजेक्ट को तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता जी के पास लेकर गए तो जयललिता जी ने भी उनके इस कार्य की ख़ूब तारीफ की व उन्हें सहयोग करने के लिए आश्वासन भी दिया था. इसके बाद प्रोफेसर वासुदेवन की इस शानदार तकनीक के बारे में सारी दुनिया को पता चला, तब कई लोगों ने उनसे यह आइडिया अच्छी क़ीमत पर खरीदने का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन प्रोफेसर वासुदेवन ने साफ़ इंकार कर दिया और अपनी ये टेक्निक नि: शुल्क ही भारत सरकार को सौंप दी, जिससे पता चलता है कि प्रोफेसर वासुदेवन एक प्रतिभाषाली वैज्ञानिक के साथ एक अच्छे इंसान भी हैं, जो अपने देश के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करने को तत्पर हैं. उनकी इस टेक्निक से देश में हज़ारों किलोमीटर तक लम्बी सड़कें भी बनाई गयी हैं.

Why India forgot its 'plastic man' and his incredible innovation? - Planet  Custodianअब तो इस तकनीक को पंचायतों, नगर पालिकाओं व NHI द्वारा भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इतना ही नहीं, इसी से प्रेरित होकर सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय ने भी प्लास्टिक के कचरे का बड़े तौर पर उपयोग करने हेतु एक मिशन की शुरूआत भी की जिसके अंतर्गत प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन हेतु जागरूकता फैलाने के लिए सारे देश में करीब 26 हज़ार लोगों को जोड़कर प्लास्टिक वेस्ट को इकट्ठा किया जा रहा है, जिससे उसका रिसायकल प्रोसेस करके सड़कों का निर्माण किया जा सके. बता दें कि हमारे देश में अब तक प्लास्टिक से करीब 100, 000 किलोमीटर की सड़कें बनाई जा चुकी हैं और बहुत से दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया जा रहा है.

वासुदेवन की इस तकनीक का उपयोग का पूरे देश में विश्व में हो रहा है और वासुदेवन को इसके लिए बहुत सारे पुरस्कार भी मिल चुके हैं, वाकई वासुदेवन की तकनीक ने इस समस्या से एक बड़ा छुटकारा दिलाने का काम किया है,