भारतीय सेना में पहली रैंक लाकर बनी लेफ्टिनेंट, एक लेक्चर ने बदल दी इनकी जिंदगी

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21वी सदी अनगिनत चीज़ों का अब तक गवाह रह चुका है और अब ये इस बात का भी गवाह है के महिलाए भी मर्दो के बराबर चल सकती है, उनमे भी मर्दो की तरह दृढ़निश्चय है, ताकत है, जज़्बा है। वो भी मर्दो के तरह अब हर काम कर सकती है और उन्हें कोई नही रोक सकता। इस बात का गवाह ये सदी है और सबूत है आज की लाखो करोड़ो महिलाए जो उच्च पदों, बिसनेस और जाने कहा कहा अपना नाम कमा रही है। उन्ही नामो में से एक नाम है “महिमा” का।

पंजाब राज्य की रहने वाली महिमा ने चंडीगढ़ सिविल इंजिनीरिंग में उतीर्ण है। इनके पिता एन. के. सिंगला बिजली विभाग में कार्यरत है और उनकी माँ – प्रतिभा हरियाणा टूरिज्म विभाग में।

Mahima

जब महिमा पंजाब के एक इंजिनीरिंग कॉलेज में थी तब इंडियन आर्मी के वॉर वेटरन कैप्टन यशिका हटवाल त्यागी इनके कॉलेज में पधारी थी। वहाँ महिमा कैप्टन यशिका त्यागी के भाषण सुन इतना प्रभावित हुई के उन्होने ने इंडियन आर्मी जॉइन करने का मन बना लिया। इसी दृढनिश्चय के साथ उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दिया। 21 साल के महिमा ने शार्ट सर्विस कॉमिशन में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस साल उन्होंने अपना ये खूबसूरत ख्वाब पूरा कर लिया और वो जल्दी ही लेफ्टिनेंट बनने वाली है।

भारतीय सेना में सिविल इंजीनियरिंग के लड़कियों का नियुक्ति 3 पद पर होता है। महिमा ने 70 हजार लड़कियों में अपना प्रथम स्थान हासिल कर आज अपने पूरे परिवार का नाम कमाया है। सलाम है महिमा के जज्बे को।