कैसे होती है चांद पर उल्टी बारिश। जानिए पूरी रोचक जानकारी-

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आपने कई बार चांद पर उल्टी बारिश के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैसे चांद पर उल्टी बारिश होती है? अगर नहीं तो आज के इस पोस्ट में हम आपको इसी की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताएंगे.

सभी देश चांद पर कुछ ना कुछ खोजने की तलाश में रहते हैं भारत ने भी साल 2008 में चंद्रमा की तरफ एक अंतरिक्ष यान को भेजा था, यह कारनामा भारत देश के सतीश धवन स्पेस सेंटर ने किया था, 22 अक्टूबर 2008 वो तारीख थी जिस दिन भारत ने एक ऐसी चीज की खोज कर दी जिससे देख दुनिया हैरान रह गई यह भारत के लिए बेहद खास दिन था इसको भेजने के बाद भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया था जिसने चांद पर अपना  चंद्रयान भेजा था.

जिस चीज की 50 सालों से वैज्ञानिक खोज नहीं कर पाए थे वह  खोज भारत के चंद्रयान ने कर दिखाई थी 1960 ईसवी के दौरान अमेरिकी कंपनी नासा ने भी अपने पहले इंसान को चांद पर भेजने में कामयाबी हासिल की थी, 1969 से लेकर 1972 तक अमेरिका चांद पर पाँच बार लोगों को भेज चुका है इसके बाद वैज्ञानिकों का मानना था कि चांद पर भी पानी हो सकता है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई थी लेकिन भारत के द्वारा भेजे गए चंद्र यहां ने यह स्पष्ट कर दिया कि चांद पर पानी का भंडार है और भारत के चंद्रयान की इस बात पर साल 2009 में मुहर लग गई, इसके बाद साल 2013 में नासा ने एक और मिशन लांच किया इस दौरान अमेरिकी कंपनी नासा ने पता लगाया कि चांद पर पानी ना के बराबर है और साथ ही चांद पर कोई आसमान भी मौजूद नहीं है.

नासा ने बताया कि उल्कापिंड जब चंद्रमा से टकराता है तो उससे बहुत सारी शक्ति उत्पन्न होती है इसी टकराव के कारण पानी सतह से ऊपर आ जाता है चंद्रमा की ग्रेविटी फोर्स कम होने से सीधा अंतरिक्ष में चला जाता है और इसी कारण लगता है कि चंद्रमा पर उल्टी बारिश हो रही है, इस दौरान बताया था कि अगर आपको चंद्रमा पर एक कप पानी की जरूरत है तो आपको चंद्रमा की सतह के लगभग 900 मीटर तक नीचे जाना पड़ेगा तब आपको एक कप पानी मिलेगा.

इंसान कई सालों से इस खोज में लगा हुआ है कि आसमान में भी ऐसा कोई ग्रह मौजूद है जिस पर इंसान निवास कर सकता है. भविष्य में भारतीय कंपनी इसरो भी अपना चंद्रयान फिर से चंद्रमा पर भेजने की प्लानिंग बना रही है इससे पहले इसरो ने साल 2019 में भी अपना चंद्रयान चंद्रमा पर उतारने की कोशिश की थी लेकिन वह किसी कारणवश असफल हो गया था जिसके बाद भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा था, इस पर भारतीय कंपनी इसरो कड़ी मेहनत कर रही है और भविष्य में  फिर से अपना चंद्रयान चंद्रमा पर उतारेगी उतार सकती है.