बेटा बना केंद्र सरकार में मंत्री लेकिन मां-बाप आज भी करते हैं खेत में काम-

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हाल ही में हुए केंद्रीय कैबिनेट मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में तो आप जानते ही होंगे इस कैबिनेट विस्तार में बहुत सारे नए चेहरे शामिल किए गए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं इन केंद्रीय मंत्रियों में एक चेहरा ऐसा भी शामिल किया गया है जो कि बेहद गरीब फैमिली से संबंध रखता है और उसके माता-पिता आज भी खेती-बाड़ी करते हैं, हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के एक छोटे से गांव कोनूर के रहने वाले मुरूगन की,,, जो हाल ही में केंद्रीय मंत्री बने हैं उन्हें केंद्र सरकार में पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन विभाग और सूचना एवं प्रशासन मंत्रालय में मिनिस्टर ऑफ स्टेट बनाया गया है.

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लेकिन इतना बड़ा पद मिलने के बाद भी इनके माता-पिता गांव में ही निवास करते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं 59 वर्षीय एल.वारुदम्मल इनकी माता जी भी इनके पिता के साथ खेत में काम करती है, जब इनका बेटा मंत्री बना तो इन्हें इस चीज़ की जानकारी भी नही थी इन्हें इसके बारे में पड़ोसियों से पता चला लेकिन पता लगने के बाद भी इन्होंने अपने काम को नही छोड़ा और पूरी मेहनत के साथ आज भी खेती करते हैं, एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनका बेटा मंत्री बना है, लेकिन मंत्री बनने में हमारा कोई भी हाथ नही है. बेटा अपनी महनत के दम पर ये सब हासिल कर पाया है. हमे बहुत खुशी है कि हमारे बेटे को मंत्री बनाया गया है.

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मुरुगन के पिता लोकनाथन ने कहा कि बेटा हमे अपने साथ रखने के लिए बुलाता है लेकिन हमारा वहाँ मन नही लगता हम जाते है और एक दो दिन रुक कर वापस आ जाते है, मुरुगन के माता पिता आज भी राशन की दुकान पर घंटो लाइन में लगकर राशन लेते है, मार्च 2020 में स्टेट चीफ़ बनाए जाने के बाद मुरुगन ने अपने माता-पिता को फ़ोन किया था. सिक्योरिटी, काफ़िले के साथ मुरुगन कोनुर पहुंचे लेकिन माता-पिता ने बेहद सादगी के साथ बेटे का स्वागत किया. मुरुगन के छोटे भाई की पत्नी और बच्चों का भी ध्यान वारुदम्मल और लोगननाथन ही रखते हैं.

'अगर मेरा बेटा मंत्री बन जाए तो मुझे क्या करना चाहिए'

एक बार माता-पिता रहने के लिए चेन्नई भी गए लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा और कुछ ही दिन बाद वहां से वापस गांव लौट आये, इस परिवार की गरीबी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुरूगन के पिता के पास खेती करने के लिए अपनी खुद की जमीन नहीं है वह किसी दूसरे आदमी से जमीन लेते हैं और उस पर खेती करते हैं. जिस आदमी का खेत ये लेते हैं उसने बताया कि बेटे के मंत्री बनने के बाद भी इनके व्यवहार में कोई अंतर नहीं आया है बेहद सादगी से यह सब के साथ व्यवहार करते हैं, एक रिपोर्ट के मुताबिक मुरूगन के माता-पिता का मानना है की वह आखिरी सांस तक अपने पैरों पर खड़ा रहना चाहते हैं वह किसी के भरोसे अपना जीवन नहीं बिता सकते.

'अगर मेरा बेटा मंत्री बन जाए तो मुझे क्या करना चाहिए'

उनका कहना है कि बेटे की इस उन्नति और सफलता पर हमें काफी खुशी हुई है और काफी गर्व की अनुभूति हुई है लेकिन हम अपने बेटे से किसी चीज की उम्मीद नहीं रखते हैं कि वह हमें कोई चीज देगा हम अपने पैरों पर खड़ा रहकर जीवन यापन करना चाहते हैं. इन दोनों की है सादगी की तारीफ पूरे गांव में की जाती है.