कमल टावरी (kamal taori),गले में गमछा और कुर्ती धोता पहनने वाला आईएएस ऑफिसर, सालो लड़ी वर्चस्व की लड़ाई-

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यह तो हम सभी जानते हैं कि आईएएस अधिकारियों का रहन सहन किसी शान ओ शौकत वाली लाइफ से कम नहीं होता, उनके पास एक बंगला होता है गाड़ी होती है नौकर चाकर होते हैं और अच्छे खासे कपड़े पहनते हैं लेकिन अगर हम आपसे कहे कि एक आईएएस (ias) ऐसा भी है जो धोती कुर्ता और गमछा डाल कर रहता है और सादा जीवन उच्च विचार के आधार पर अपना जीवन बिताता है, आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन है जो आलीशान जिंदगी को छोड़कर गरीबों जैसी जिंदगी बिताता है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र में जन्मे कमल टावरी के बारे में कहा जाता है कि कमल टावरी पहले सेना में कार्यरत थे उसके बाद 1968 में आईएएस बने इसके बाद सचिव बने फिर लेखक और फिर समाज सेवा का जिम्मा अपने कंधों पर लिया, और इसके साथ ही लोगों को मोटिवेशन देने का काम भी करते हैं अब आपके दिमाग में और कन्फ्यूजन पैदा हो गया होगा ऐसा कौन व्यक्ति है जो इतने सारे काम कर चुका है और फिर भी खादी के कुर्ता धोती में रहता है.

Kamal Taori IAS Biography: कमल टावरी: गम्छा लाटकाने वाला IAS अफ़सरआपको बता दें, कमल टावरी 2006 तक युपी के कई जिलों के कलेक्टर और कमिश्नर रह चुके हैं इसके साथ ही केंद्र सरकार के सचिव के पद पर भी उन्होंने कार्य किया है. कमल टावरी का जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र में हुआ था, कमल बचपन से ही कुछ बड़ा करना चाहते थे और बेहद ही संघर्षशील थे. कमल हर असंभव काम को संभव करने की असीम संभावना रखते थे और कमल ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर आर्मी में कर्नल का पद हासिल किया. इनके बारे में कहा जाता है कि कमल जब आर्मी में गए तब भी ऐसे ही सादा जीवन जीते थे साइकिल से चलना और साधारण कपड़े पहनना ही कमल की आदत है.

Kamal Taori IAS Biography: कमल टावरी: गम्छा लाटकाने वाला IAS अफ़सर6 साल बाद कमल ने आर्मी की जॉब को छोड़ दिया उसके बाद यूपीएससी की प्रिपरेशन में जुट गए और एग्जाम को क्वालीफाई करने के बाद आईएएस बने लेकिन उनका व्यवहार शांत और हंसमुख हमेशा ही रहा. कमल 22 वर्षों तक ग्रामीण विकास पंचायती राज उच्च स्तरीय लोक प्रशिक्षण जैसे विभागों में भी कई सालों तक कार्यरत रहे. इनके बारे में कहा जाता है कि जहां भी सरकार ने भेज दी थी वहां के माहौल को यह अपने मुताबिक बना देते थे आपको बता दें कि कमल यूपी के गाजीपुर और अयोध्या जैसे जिलों में डीएम भी रह चुके हैं. और कामल अभी तक अपनी 40 पुस्तकें प्रकाशित करवा चुके हैं जो कि बेहद बड़ी बात होती है, अगर इनकी शिक्षा की बात करें तो इन्होंने एलएलबी होने के साथ-साथ इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट की डिग्री भी प्राप्त की है.

Kamal Taori IAS Biography: कमल टावरी: गम्छा लाटकाने वाला IAS अफ़सरभाग्योदय फाउंडेशन के राम महेश मिश्रा बताते हैं कि जब टावरी साहब केंद्र सरकार के सचिव थे तभी उन्होंने अचानक से यह निर्णय लिया कि वह आज से खादी के वस्त्र ही पहनेंगे. मिश्रा बताते हैं कि टावर टावरी का स्वभाव बेहद ही हंसमुख और हर किसी से भी बात करने वाला है. वह आपको धोती कुर्ता और गले में गमछा डाले हुए किसी से भी बात करते हुए मिल जाएंगे बावड़ी के बारे में कहा जाता है कि वह हमेशा ही साथ और ईमानदारी के साथ खड़े रहते हैं चाहे उसका अंजाम कुछ भी हो और इसकी वजह से उनके कई बार तबादले भी हुए आप इनकी निर्भीकता का उदाहरण है.

Kamal Taori IAS Biography: कमल टावरी: गम्छा लाटकाने वाला IAS अफ़सरइससे समझ सकते हैं इस साल 1985 में अयोध्या में जब यह तैनात थे तो तभी अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा एक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया था और जिसके विरोध में यह खड़े हो गए थे उनका कहना था कि यह फैसला गलत है और इसका अंजाम उन्हें उठाना पड़ा था और उन्हें रातों रात ही नौकरी से हटा दिया गया था, वर्तमान की बात करें तो कमल टावरी युवाओं को रोजगार करने के तरीके बताते हैं और वह काम करने के प्रति भी लोगों को मोटिवेट करते हैं टावरी का मानना है कि हम सबके अंदर एक अलग टैलेंट छुपा हुआ है सिर्फ उसे पहचानने की जरूरत है, टावरी का मानना है कि आज आपके पास जो भी चीज मौजूद है उसी को लेकर अपने काम में जुट जाइए मेहनत करिए मेहनत एक ऐसा रास्ता है जिस पर अगर आप चले गए तो आपको मंजिल निश्चित ही मिलेगी. अपने जीवन में 40 वर्षों तक बड़े-बड़े पदों पर रहने वाला यह व्यक्ति आज अपने गांव में रहता है और युवाओं के लिए लगातार कुछ नया करने का प्रयास करता रहता है कमल टावरी अपनी इस सफलता के ऊपर रत्ती भर भी घमंड नहीं करते हैं. वह हर किसी से बतियाते हुए चौराहों पर मिल जाते हैं वह बताते हैं कि उनका एक ही लक्ष्य है ज्यादा से ज्यादा युवाओं को प्रोत्साहित करें और उनको अच्छे काम करने के गुण सिखाए.