दो भाई जिन्होंने घड़ी डिटर्जेंट को नंबर वन बना दिया, एक कमरे से की थी शुरुआत.

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भारत के लगभग हर घर में उपयोग किया जाने वाला डिटर्जेंट, जब डिटर्जेंट नाम याद आता है तो दिमाग  में  एक ही नाम सबसे पहले आता है घड़ी डिटर्जेंट पाउडर “पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें”. इस स्लोगन के साथ घड़ी डिटर्जेंट पाउडर ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं, घड़ी फर्श से अर्श तक कैसे पहुंचा, घड़ी कैसे बना भारत का नंबर वन डिटर्जेंट पाउडर. आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे दो भाइयों ने मिलकर घड़ी को इस मुकाम पर पहुंचा दिया.

सबसे पहले घड़ी की शुरुआत करने वाले दो भाई मुरली बाबू और विमल ज्ञानचंदानी थे, इन दोनों भाइयों ने मिलकर कानपुर में फजलगंज फायर स्टेशन के पास अपनी छोटी सी डिटर्जेंट फैक्ट्री खोली, लेकिन इन भाइयों की सोच के मुताबिक काम नहीं चल रहा था. इस फैक्ट्री का नाम उन्होंने महादेव शॉप इंडस्ट्री रखा लेकिन यह फैक्ट्री अपना जलवा नहीं बिखेर पाई, और यह काम बंद हो गया.

लेकिन दोनों भाइयों के हौसले अब भी बुलंद थे इन दोनों ने फिर से एक और कंपनी खोली, और नाम दिया घड़ी डिटर्जेंट. उस समय घड़ी के सामने मार्केट में निरमा, व्हील जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां थी, और उस समय घड़ी बिल्कुल नया प्रोडक्ट मार्केट में आया था. घड़ी को आगे बढ़ने में यह कंपनी चुनौती बनी हुई थी. उसी दौरान इन दोनों भाइयों ने गाड़ी को एक नया टैग लाइन दिया और टैग लाइन काम कर गया.

हालांकि आपको बता दें उस समय घड़ी की क्वालिटी तो अच्छी तो होती ही थी, साथ ही पैसा भी बहुत कम होता था. इसके बाद इसे भारत के दूसरे राज्यों में भी निर्यात किया जाने लगा, और आज घड़ी एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां हर बच्चे के मुंह पर यह स्लोगन सुनने को मिल जाएगा. इन दोनों भाइयों के संघर्ष को लोग आज भी सलाम करते हैं एक छोटे से कमरे से शुरुआत करने वाले दोनों भाई आने एक दी कंपनिय के मालिक हैं.

इसके बाद घड़ी यहीं नहीं रुका उसने छोटे व मध्यम वर्गीय परिवारों से संपर्क करना शुरू किया, और उनको अपने साथ में लेने का काम, किया जिसके कारण इस ब्रांड को और पहचान मिली. और इनकी मेहनत और हौसले का ही नतीजा है कि घड़ी आज भी नंबर वन डिटर्जेंट पाउडर बनी हुई है.

साथ ही अगर इन दोनों भाइयों की धन संपत्ति की बात करें तो दोनों भाइयों के पास लगभग आज के समय में 12000 करोड़ की संपत्ति है. आपको बता दें कि इन दोनों के बच्चे भी इसी बिजनेस को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, घड़ी डिटर्जेंट कि देश में अब कई ब्रांच हो चुकी हैं और इसका विदेशों में भी माल जाता है.