गरीबी से लड़कर भारत के ये 7 क्रिकेटर बने सुपरस्टार

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भारत में क्रिकेट के खेल सबसे अधिक लोकप्रिय हैं, यही कारण है कि क्रिकेटरों पर लगातार पैसों की बारिश होती हैं. भारत के लिए खेलने के आलावा आईपीएल से भी खिलाड़ियों को करोड़ो की कमाई होती हैं.

लेकिन खिलाड़ियों की यहाँ तक पहुँचने की राह इतनी आसान नहीं होती हैं. आज इस लेख में हम 7 ऐसे इंडियन खिलाड़ियों के बारे में जानेगे, जिन्होंने भारत के लिए खेलने से पहले गरीबी से जंग लड़ी हैं.

1) रवीन्द्र जडेजा

कई क्रिकेट प्रशंसकों को इस तथ्य के बारे में पता होगा कि भारतीय हरफनमौला खिलाड़ी, रवींद्र जडेजा का बचपन बेहद गरीबी में बीता क्योंकि उनके पिता एक सुरक्षा गार्ड थे, जबकि उनकी माँ एक नर्स थीं.

वे सरकारी क्वार्टर में रहते थे, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के कारण, जडेजा भारत के सबसे अच्छे ऑलराउंडरों में से एक बन गए हैं, और अब, हर कोई उनकी संपत्ति, घर और अन्य गुणों के बारे में जानता है.

2) एमएस धोनी

इस सूची में चेन्नई सुपर किंग्स के एक अन्य खिलाड़ी पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं. रांची के दाएं हाथ के बल्लेबाज ने फिल्म एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी के जरिए दुनिया को अपना सफर दिखाया.

2011 के विश्व कप विजेता कप्तान की रह आसान नहीं रहा हैं क्योंकि उनके पिता पिच क्यूरेटर थे, जो चाहते थे कि उनका बेटा टिकट कलेक्टर बने. पिता के सपनों को पूरा करने के लिए, धोनी ने रेलवे में भी काम किया, लेकिन आखिरकार, सब कुछ छोड़कर अपना सपना जिया और भारत के सबसे सफल कप्तान और बल्लेबाज बने.

3) भुवनेश्वर कुमार

उत्तर प्रदेश के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि उनके पास क्रिकेट खेलने के लिए उचित जूते तक नहीं थे.

हालाँकि, उनके पिता और उनकी बहन हमेशा उनका समर्थन करते रहे, और अब, वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पेसरों में से एक हैं. वह बीसीसीआई के सेंट्रल सालाना अनुबंध से मोटी कमाई करते हैं. इसके अलावा, उनकी आईपीएल फ्रैंचाइज़ी, सनराइजर्स हैदराबाद भी उन्हें मोटी फीस देती हैं.

4) उमेश यादव

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के तेज गेंदबाज उमेश यादव भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी करने के लिए कमर कस रहे हैं. अपने मुश्किल भरे बचपन के कारण, वह कभी हार न मानने की कला जानते हैं.

उमेश के पिता एक कोयला फैक्ट्री में काम करते थे, जिन्होंने अपने परिवार को उचित भोजन उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष किया. फिर भी, उनके बेटे ने क्रिकेट के मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व करने के अपने सपने को पूरा किया.

5) मुनाफ पटेल

भारत की विश्व कप 2011 की विजेता टीम के सदस्य, मुनाफ पटेल बड़ौदा के एक कम आय वाले परिवार से हैं. उनके पिता के पास अपनी जमीन नहीं थी. इसलिए, उसे किसी और के खेत में काम करना पड़ा.

जब परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, तो उसके रिश्तेदारों ने मुनाफ को अपने पिता के साथ हाथ बटाने की सलाह दी लेकिन, उनकी किस्मत को कुछ और मंजूर था उन्होंने कड़ी मेहनत की और क्रिकेटर बने गये. जिसके बाद मुनाफ ने अपने तेज़ गेंदबाज़ी कौशल से करोड़ों रुपये कमाए.

6) हरभजन सिंह

हरभजन सिंह खेल के तीनों प्रारूपों में सबसे सफल भारतीय गेंदबाजों में से एक हैं. हालाँकि, भज्जी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बनाने से पहले गरीबी से जूझना पड़ा.

एक बार वीरेंद्र सहवाग ने खुलासा किया कि परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण हरभजन सिंह ने ट्रक ड्राइवर बनने की सोची थी. लेकिन, वह उस चेहरे से लड़ने और उस स्टारडम को हासिल करने में कामयाब रहा, जिसके वो हक़दार थे.

7) इरफान और यूसुफ पठान

पठान भाइयों के भारत के लिए खेलने से पहले उनके पिता 250 रुपये के वेतन पर काम करते थे. अपने बेटो के सपनो को पूरा करने के लिए पठान के पिता पुराने जूते लाकर खुद सिलते थे और अपने बेटों को देते थे.

पठान बंधू टी-ट्वेंटी वर्ल्ड 2007 की चैंपियन टीम के सदस्य रहे हैं इसके आलावा दोनों खिलाड़ियों ने आईपीएल में काफी प्रसिद्दी हासिल की हैं, जिसके पीछे उनके पिता की भूमिका अहम रही हैं.